एहसास ए दर्द…
Updated: Sep 3, 2025
By Tejash Burad
बेनाम सा ये दर्द ज़िंदगी में ठहर क्यूँ जाता है,
जो क़रीब हो सबसे ज़्यादा वो दूर क्यूँ हो जाता है,
और ना जाने किन रातों के इंतेज़ार में वक्त-बेवक्त घर जाते हैं,
फिर ज़माने को क्या समझाए जब खुद ही नहीं समझ पाते हैं,
और जो बीत गया है पल वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता,
डगमगाते हुए इन रास्तों में संभल क्यूँ नहीं जाता,
फिर एक शकस की ख़ातिर कब तक लड़ेंगे ज़माने से,
अपनी मर्ज़ी से जाने वाले काश तुम आजाओ किसी बहने से…
By Tejash Burad

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