एहसास
Updated: Sep 3, 2025
By Ankit Kumar Roy
जिस दर से कभी नज़रे चुरा लेता था,
आज उस दर पे पड़ा हूं ।
के तेरी मोहब्बत के खातिर,
मैं कुरान भी पढ़ा हूं।
हर आयत में तेरी आवाज़ सुनता हूं।
हर दुआ में तुझे याद करता हूं।
के निकाह कुबूल हो सके तुझसे,
बस यही फ़रियाद करता हूं।
मैं हिंदू हूं,ये याद है मुझे,
पर तेरे मुसलमां होने पर नाज़ करता हूं ।
और मरियम की कोई तस्वी तो नही देखी,
पर तेरे ज़रिए ,दीदार करता हूं।
By Ankit Kumar Roy

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