एक राज़ हूँ मैं
By Shruti Lad
नीले गगन सा
बहती पवन सा
अविस्मरणीय अनकहा सा
एक ख्वाब हूँ मैं
कुछ उलझा सा हूँ मैं
कुछ सुलझा हुआ सा
अपरिचित अन्जाना
समझ के पर बेहिसाब हूँ मैं
होठों पर मुस्कान लिए
समक्ष हूँ दुनिया के
दिल में ग़मों से भरपूर
बस आईने में बेनकाब हूँ मैं
बड़बोला कभी हूँ
गुमसुम कभी
खिलखिलाता या बिलखता
भावनाओं का इक सैलाब हूँ मैं
निरुत्तर सवालों सा
इक मुश्किल पहेली सा
खुद को समझने को
बेताब हूँ मैं !
By Shruti Lad

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