एक रंगीन कोठा
By Shovit Raj
यह दुनिया एक रंगीन कोठा है और इस रंगीन कोठे
के हम सब तवायफ़ है ,
जैस तवायफें सजधज के अपने-अपने ग्राहकों को
लुभाने के लिए अपनी जिस्म बेचती है,
ठीक उसी तरह इस रंगीन कोठे हम सब भी अपने-
अपने ग्राहकों को लुभाने के लिए कुछ ना
कुछ ज़रूर बेच ही रहे हैं !!
किसी ने अपने किस्से बेचें हैं तो
किसी ने अपनी बीती कहानियों को बेचा है,
कोई अपना हाल बेच रहा है ,
तो कोई अपना चाल बेच रहा है ,
कोई अपना बाल बेच रहा है
तो कोई अपना खाल बेच रहा है
,
किसी ने अपने ग़म को बेचे
किसी ने अपनी खूसी बेची है ,
किसी ने अपने सपने बेचे है तो ,
किसी ने अपनी हक़ीक़त बेची है ,
किसी ने अपनी समझदारी बेची है
किसी ने अपने बेवक़ूफ़ी बेची है !!
कोई अपनी ईमानदारी बेच रहा है
तो कोई अपनी बेमानी बेच रहा है ,
कोई धर्म बेच रहा है ,
तो कोई कर्म बेच रहा है ,
किसी ने मंदिरें बेची ,
किसी ने मस्जिदें बेची
किसी ने गुरुद्वारे बेचे ,
तो किसी ने गिरिजाघर बेचा!
कोई आजनी बन के बेच रहा है ,
कोई काफ़िर बन के बेच रहा है ,
कोई प्यार बेच रहा है ,
तो कोई नफ़रत बेच रहा है !!
किसी ने सच्चाई बेची है
तो किसी ने झूठे वादे बेचे हैं
किसी ने अपनी हार बेची
तो किसी ने जीत बेची है ,
किसी ने सवाल बेचे है ,
तो किसी ने जवाब बेचे हैं
किसी ने अपनी हँसी बेची तो
किसी ने अपने आँखों के
आँसुयों को बेचा है !!
इस दुनिया के रंगीन कोठे
हम सब नाजायज़ बन के अपने -
अपने वजूद और अपने-अपने
जीवन के अंत को बेच रहे हैं!!
By Shovit Raj

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