एक भीगी शाम
Updated: Dec 2, 2022
By Monica Banerjee
एक भीगी शाम पुस्तकालय की चौकोर मेज़ के उस पार से.....
टीन के छज्जे पर बारिश की बूँदें
मधुर छंदों का बोध कराए
गतिमान पंक्तिबद्ध लहरें
मन की तृष्णा और बढ़ाए
विगत कई दिनों से
मन व्यथित तो नहीं
पर प्रफुल्लित भी तो नहीं
अंतर्द्वंद की छाया नहीं
पर अमन से दूरियाँ यूँ ही रहीं
‘मन’ को सीमाओं में रखना
शायद मन ने सीख लिया है
उन्मादी गतिशीलता से आख़िर
शिथिल स्थिरता ही भली
सागर के कोलाहल से
नदी की सौम्यता को ही तो
आप सबने अक्सर सराहा है I
By Monica Banerjee

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