एक तरफा प्यार
By Ami Mehta
आज उस बक्से की तरफ ध्यान गया
जो कभी रोज़ खोला करती थी
तुमसे जुड़ी हर चीज़ को उसमे डाला करती थी
वो बक्सा तुम्हारी हर बात मुजे याद दिलाया करता है
हमारे रिश्ते का प्यार, जो मे एक तरफा निभाया करती थी।
तुम मुजसे ज़्यादा मेरे चेहरे का रंग देखा करते थे
मे पगली उसको तुम्हारा मज़ाक समाजके हस दिया करती थी
मुजे लगा प्यार करने के लिए सिर्फ प्यार की ज़रूरत होती है
इतनी शर्तो के साथ है ये नहीं जानती थी।
यह बक्सा तुम्हारी मीठी सी याद नहीं बल्कि धोके की निशानी है
जिसमे से तुमने अपना दिल निकाल लिया था
जिसको मे कभी अपना माना करती थी।
By Ami Mehta

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