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एक कसम खाएं

Nov 10, 2022
2 min read

By अनिल कुमार


रफ़्तार में भागती ज़िंदगी में कितना वक़्त है अपने लिए ,

आज एक कसम खाएं , कुछ समय निकालें अपने लिए ॥

कितने नंबर हैं फ़ोन बुक में , लेकिन मिलाने के लिए वक़्त नहीं है ,

आज एक कसम खाएं , कुछ वक़्त निकालें अपनों के लिए ॥

सबको सोशल मीडिया पर विश करते हैं , दोस्ती जताने के लिए ,

आज एक कसम खाएं , दोस्त को गले लगाने के लिए ॥

सेल्फ़ी विद डॉटर चला दिया , नाम कमाने के लिए ,

आज एक कसम खाएं उसको निर्भय बनाने के लिए ॥

बेटियां मारी जा रही हैं कोख में, बेटों के लिए ,

आज एक कसम खाएं , बेटी बचाने और आगे बढ़ाने के लिए ॥

कोई रावण अपने कदम न बढ़ाने पाये, उस सीता के लिए ,

आज एक कसम खाएं, उसे दुर्गा बनाने के लिए ॥

बच्चों को  हम ताउम्र पढ़ाते रहे, उनकी नौकरी के लिए ,

आज एक कसम खाएं , उन्हें संस्कार सिखाने के लिए ॥

भारत देश में बहुत कुछ बदल रहा है , विकास के लिए ,

आज एक कसम खाएं, इस वापस सोने की चिड़िया बनाने के लिए ॥





हमारे वीर सैनिक तैनात हैं सरहदों पर, हमारे अस्तित्व लिए ,

आज एक कसम खाएं , उनके नमन के लिए ॥

मन चंगा तो कठौती में गंगा , स्वच्छ भारत के लिए ,

आज एक कसम खाएं, अतुल्य भारत के लिए ॥

अंग्रेजी नामों वाले सामान लेते हैं, जेंटिलमन कहलाने के लिए,

आज एक कसम खाएं, स्वदेशी अपनाने के लिए ॥


सदा सत्य बोलो-ईमानदार बनो , यह शब्द रह जाएंगे किताबों के लिए ,


आज एक कसम खाएं, भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए ॥

आज पशु रक्षक अपने कर्म को भूले हैं, निज स्वार्थ के लिए ,

आज एक कसम खाएं, इनके अस्तित्व के लिए ॥

भरी दोपहरी में लोग बैठ जाते हैं एसी में, ठंड और आनंद के लिए ,

आज एक संकल्प खाएं, दरवाजे पर पानी रखें प्यासे विहग के लिए ॥

जितना ज़रूरी हो उतना भोजन खाएं, इस पेट और शरीर के लिए ,

आज एक संकल्प खाएं , उस भूखे समाज के लिए ॥

हिंदुस्तान में हिंदी के सिवा सब कुछ है, बदलाव के लिए ,

आज एक कसम खाएं , इस देवराग के लिए ॥


By अनिल कुमार






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