एक कसम खाएं
By अनिल कुमार
रफ़्तार में भागती ज़िंदगी में कितना वक़्त है अपने लिए ,
आज एक कसम खाएं , कुछ समय निकालें अपने लिए ॥
कितने नंबर हैं फ़ोन बुक में , लेकिन मिलाने के लिए वक़्त नहीं है ,
आज एक कसम खाएं , कुछ वक़्त निकालें अपनों के लिए ॥
सबको सोशल मीडिया पर विश करते हैं , दोस्ती जताने के लिए ,
आज एक कसम खाएं , दोस्त को गले लगाने के लिए ॥
सेल्फ़ी विद डॉटर चला दिया , नाम कमाने के लिए ,
आज एक कसम खाएं उसको निर्भय बनाने के लिए ॥
बेटियां मारी जा रही हैं कोख में, बेटों के लिए ,
आज एक कसम खाएं , बेटी बचाने और आगे बढ़ाने के लिए ॥
कोई रावण अपने कदम न बढ़ाने पाये, उस सीता के लिए ,
आज एक कसम खाएं, उसे दुर्गा बनाने के लिए ॥
बच्चों को हम ताउम्र पढ़ाते रहे, उनकी नौकरी के लिए ,
आज एक कसम खाएं , उन्हें संस्कार सिखाने के लिए ॥
भारत देश में बहुत कुछ बदल रहा है , विकास के लिए ,
आज एक कसम खाएं, इस वापस सोने की चिड़िया बनाने के लिए ॥
हमारे वीर सैनिक तैनात हैं सरहदों पर, हमारे अस्तित्व लिए ,
आज एक कसम खाएं , उनके नमन के लिए ॥
मन चंगा तो कठौती में गंगा , स्वच्छ भारत के लिए ,
आज एक कसम खाएं, अतुल्य भारत के लिए ॥
अंग्रेजी नामों वाले सामान लेते हैं, जेंटिलमन कहलाने के लिए,
आज एक कसम खाएं, स्वदेशी अपनाने के लिए ॥
सदा सत्य बोलो-ईमानदार बनो , यह शब्द रह जाएंगे किताबों के लिए ,
आज एक कसम खाएं, भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए ॥
आज पशु रक्षक अपने कर्म को भूले हैं, निज स्वार्थ के लिए ,
आज एक कसम खाएं, इनके अस्तित्व के लिए ॥
भरी दोपहरी में लोग बैठ जाते हैं एसी में, ठंड और आनंद के लिए ,
आज एक संकल्प खाएं, दरवाजे पर पानी रखें प्यासे विहग के लिए ॥
जितना ज़रूरी हो उतना भोजन खाएं, इस पेट और शरीर के लिए ,
आज एक संकल्प खाएं , उस भूखे समाज के लिए ॥
हिंदुस्तान में हिंदी के सिवा सब कुछ है, बदलाव के लिए ,
आज एक कसम खाएं , इस देवराग के लिए ॥
By अनिल कुमार

Comments