एक आवाज़
By Menka Gupta
मैं हूँ एक आवाज़
जो आई है कराने ग़लती का एहसास
अभी तक नहीं हुआ हमें जिसका आगाज़
क्या इसी दिन का था इंतज़ार ??
जब वो मासूम चीखी चिल्लाई
क्या थी उसकी गलती क्या किआ था उसने जुर्म ?
कि इतनी भयानक सज़ा उसने पाई
शायद यह आवाज़ किसी तक ना पहुँच पाई
क्या यह गलती है एक औरत की
उसने ही पुरुष को जन्म दिआ
सोचा ना था
ऐसा दिन भी आएगा
जब वही पुरुष एक शैतान बन जायेगा
तड़प तड़प के गई दामिनी
छोड़ गई अपनी सांसें
उसके सपने उसकी वो यादें
देश की हर बेटी ने यह गहरी चोट खाई है
याद दिलाने फ़र्ज़ तुम्हारा यह आवाज़ तुम तक आई है
लड़की होना एक अभिशाप सालों से सुनते आये
सच में अब तो घर से भी हम बहार निकल ना पायें
क्यों लड़की का जीवन है अब भी इतना मुश्किल
कोई ओर डगर कोई उम्मीद अब हमको नज़र न आये
इज़्ज़त औरत का गहना है
उसका सदा सम्मान करो
अपनी मानवता का
ऐसे न अपमान करो
आज ही दृढ़ निश्चय करते हैं
भारत को सु रक्षित बनाएंगे
फिर ना होगा कभी यह अपराध
जब हर लड़की की इज़्ज़त करना सीख जायँगे
By Menka Gupta

Comments