एक अवतार जरूरी है
By Veena Agrawal
समय भी बदला, युग भी बदला
नाम भी बदलें, पहचान भी बदली
मानव प्रवृति बदल नहीं पाई है।
अपराध वही है, अपराधी भी वही है,
सजा किसे मिल पाई है।
कभी वचन के नाम पर,
कभी धर्म के नाम पर,
सच्चाई ने वनवास ही पाया है।
नारी ने भी दी अग्निपरीक्षा,
हर युग में अपमान ही पाया है।
जब युग परिवर्तन होना ही है,
तो क्या पाप का चरम जरूरी है,
सम्पूर्ण विनाश जरूरी है?
कहीं कीटों का प्रकोप है छाया,
कहीं भूकंप से धरा थर्रायी है।
समंदर में भी उठा जलजला,
चारों ओर मची तबाही है।।
महामारी ने तांडव है मचाया,
चारों ओर मचा हाहाकार है।
मानव रक्षा भी तो जरूरी है,
नव युग निर्माण जरूरी है,
एक अवतार फिर जरूरी है।
होना ही है युग परिवर्तन,
दोहरा रहा इतिहास युगों को,
तो आज एक अवतार फिर जरूरी है।।
By Veena Agrawal

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