एक 'अ-दूरी' कविता
Updated: Sep 16, 2025
By Vishwajeet Jitendra Ghorade
पास होकर भी दूर हो,
मीलों की है ये दूरी
कही तुम्हें पाने की ख्वाहिश
रह न जाए अधूरी।
ख्वाबों में, खयालों में और खुदा की इबादत में हो तुम
ना होती तेरे सपनो के बिना ये निंद पूरी|
पास होकर भी दूर हो,
‘फ़ितूरी’ है ये दूरी|
जब तुम मेरे साथ होगी और मिट जाएगी हर दूरी
तब जाकर कहीं पूरी होगी
ये दो लफ़ज़ो की कविता,
जो रह गई है अधूरी....
By Vishwajeet Jitendra Ghorade

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