ए रात तुझमे कुछ बात है
By Ajay Jaal
ऐ रात तुझमे कुछ बात है
तू अकेला नही कोई तेरे साथ है
कहीं सन्नाटे है कहीं शोर गुल
अंधेरा और रौशनी जैसे आजाद है
ऐ रात तुझमे कुछ बात है
तू अकेला नही कोइ तेरे साथ है
तुझे देख के बच्चे डरते हैं
तुझे देख जवान भरमते है
और बुजुर्गों का क्या कहना
वो मीठी यादों में मरते है
तेरी खामोशी किसी के लिए डर
तो किसी के लिए सुरीली साज है
ये किसी के नींद का वक़्त
या इस वक़्त में किसी का काम काज है
ऐ रात तुझमे कुछ बात है
तू अकेला नही कोई तेरे साथ है
तुझे देखे से सब को राहत है
थक जाए जो उसकी तू चाहत है
और जागने वालों को क्या कहना
ये नींद भी जिसकी बुलाहट है
तू भी इस जहान में करता राज है
ये चांद तारे जैसे तेरे तख्तों ताज है
ये खामोशी जो चारो ओर फैली है
सायद यही तेरे प्यार का अंदाज है
ऐ रात तुझमे कुछ बात है
तू अकेला नहीं कोई तेरे साथ है
ऐ रात तुझमे कुछ बात है
तू अकेला नही कोइ तेरे साथ है
कहीं खामोशी कही शोर गुल
अंधेरा और रौशनी जैसे आजाद है
By Ajay Jaal

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