उसूल (पंछी के माध्यम)
By Uday Kumar
मुझे चाहिए नहीं दया की भीख किसी का,
मुझे चाहिए नहीं झूठा प्रेम की रीत किसी का!
मैं उन्मुक्त गगन में उड़ता इठलाता,
खुशियों का संसार गगन है,
पिंजर वन मुझको न भाता !
मुझे अधिकार कहाँ मिली है,
सिर्फ किताबी पन्नों में!
शिकारियों की जाल बिछी है,
लोभ और प्रलोभ न दे !
मैं उसमें फस जाऊँगा,
ऐसा मुझे नहीं लगता!
पर समय के चक्कर में,
सिमट जाऊँ जैसा लगता!
कौन बचाएगा मुझको? लोभ फरेब के चक्कर से!
कौन दिखाएगा मुझको? राह इंसाफ के झग्गड से!
देश बने गुलजार हमारा,
यह सपना साकार बने!
चाहे कोई रोड़ा आए ,
हम उसका जवाब बनें!!
पंछियों में जब सोच यहाँ तक,
हम तो मानव जाति है!
स्वार्थ भेदजब मिट जाए तो,
एक दूसरे का साथी हैं!
व्यभिचार आज पनप रही है,
डर अपनी परछाई से!
स्वार्थपरता जन-जन में है,
डर है भाई-भाई से!
सबक सीख लें इस पंछी से,
जिसका पूरा देश बसेरा!
सभी भाई दुश्मन न कोई,
लड़ कर मिटने का छोड़ बखेरा!!
By Uday Kumar

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