उससे ज़्यादा
By Siddharth Janartha
तुम जितना सोचा करते हो
उससे ज़्यादा ताकतवर हो
डर लगता है दुनिया में पर
तन्हा चलने से मत डरना
दुखते पांव, दूर भी है घर
लेकिन सफ़र को पूरा करना
तुम जैसा दुनिया में कहां हो
बढ़कर छू लो आसमान को
सच कर दो अपना हर सपना
धरती अपनी गगन है अपना
फिर किस बात का तुम को डर हो
तुम जितना सोचा करते हो
उससे ज़्यादा ताकतवर हो
प्रकृति में कुछ स्थायी नहीं है
लोगों की भी राय यही है
परिवर्तन जीवन का मोल है
कोई किसी के साथ नहीं है
पथ में हर चेहरा अंजाना
तेज़ धूप है मैंने माना
पर जलते जाना करना ये हट
चलते जाना बस रुकना मत
थोड़ी सी भी जान अगर हो
तुम जितना सोचा करते हो
उससे ज़्यादा ताकतवर हो
दुनिया बनी तुम्हारे हित है
सुन लो! दुनिया बोल रही है
कर्म प्रधान ही रखना तुम
बड़े बुजुर्गों ने ये कही है
रोकेंगे ये दुनिया वाले
लेकिन मैं कहता हूं तुमसे
दुनिया कदमों में है तुम्हारे
ना झुकने की जो आदत हो
हिम्मत भी गर मुट्ठी भर हो
तुम जितना सोचा करते हो
उससे ज़्यादा ताकतवर हो
By Siddharth Janartha

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