उसने प्रेम ही प्रेम रख छोड़ा
By Anil Kumar
उसने तारों को इकठ्ठा कर लिया
आकाश की छत पर
उसने चन्द्रमा को बुलावा भेजा
खाने की मेज़ पर
उसने फूल की तरफ इठलाते हुए देखा
और कहा
सहेली हो तुम सहेली
उसने आकाश और पृथ्वी तक की दौड़ लगाई
उसने प्रेम ही प्रेम रख छोड़ा।
By Anil Kumar

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