उस ओर से…
By Harsh Vardhan Poddar
। चल इस बार अनंत के उस ओर से शुरू करे ये कहानी ।
। माना अंत पता होगा पर अंजान होगी तोह कहानी ।
। हर कदम पीछे बढ़ेगा और सील जाएगा उधड़ा थान ही ।
। झरना शायद ऊपर चड़ेगा साफ हो जाएगा वो पानी ।
। पक्षियों के जूंड शायद बढ़ते जाएंगे लौट आएंगी बैल गाड़ी ।
। बस गीत वहीं होंगे सब और वही होगी दास्तां पुरानी ।
। जगा दो अब मुझको इस नींद से बेकार है कोई उमीद लगानी ।
। चल इस बार अनंत के उस छोर से शुरू करे ये कहानी ।
By Harsh Vardhan Poddar

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