उर्मिला
Updated: Jun 7, 2023
By भारती बिंदु
वो प्रियतम साथ में
उपवन रही वन रही
हर पल हर स्थल
हर सुख दुख कही
मैं विरहाग्नि में
दहती सहती हुई
तिल तिल जली
तिल तिल जगी !!
नाम उसका हरमुख
आजतक प्रथम आया
सीता राम सीता राम
हर मन मंदिर समाया
नाम मेरा हे सखि !!
किसने कहा ? किसने सुना ??
प्रतीक्षारत दीपशिखा सी
द्वार चतुर्दश वर्ष जली !!
थी मांडवी श्रुति कीर्ति भी
अपने प्रियतम के सामने
रही खड़ी मैं अभागिन
अपने शून्यगृह को थामने !!
हे तात ! तूने किस लिए
नाम "उर्मिला "मेरा कहा ?
वियोग सागर मध्य मेरे
उर्मि जीवन भर रहा !!
मौन थी मौन हूं
मौन ही रहूंगी !!
जनक सुता !रघुकुल वधू !
मैं भी हूं??मुख से
कुछ न कहूंगी !!
By भारती बिंदु

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