उम्र १३
By Bhumika Pandita
तकिये के नीचे रखे कुछ ख्वाब,
एक फटी पुरानी किताब;
मिट्टी से सनी वो चप्पल,
वो माँ का बुना हुआ कम्बल;
ढूंढ रहा है दिल ये अब मेरा,
वो यादें और वो उम्र १३।
वो दोस्तों का रूठना मनाना,
वो इच्छा कि बदल देंगे ज़माना;
वो कंचे,वो टूटे शीशे,
वो भागना एक दुसरे के पीछे;
ढूंढ रहा है दिल उस दोस्त का चेहरा,
वो यादें और वो उम्र १३ ।
कैसे आ गए इस राह पर,
सपनों पर मिट्टी डाल कर;
हर आसान मोड़ लगता है अब मुश्किल,
रूठी सी ज़िन्दगी और टूटा सा दिल;
पीछे छूट गया वो रैन बसेरा,
वोयादेंऔरवोउम्र१३।
By Bhumika Pandita

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