उम्मीद
By Mona Mamtani
मैं उम्मीद हूं।
अनेक रूप से सजी हूं,
कोई रंग नहीं हर रंग की हूं मैं।
कोई आकार नहीं देखा कभी, हर आकार की हूं मैं।
किसी की आँखों की नमी
तो किसी के होंठ की छिपी हसी हूं मैं।
किसी के ख्वाब का इजहार
तो किसी के दिल की धड़कन का एहसास।
हाँ उम्मीद हूं मैं।
मां की आंचल की छाया हो या,
पिता के चौडे सीने की शान,
दोस्तों के दिल का करार हो या,
किसी के सपनों की उड़ान।
हाँ उम्मीद हूं मैं।
हर शकस की ढाल हूं मैं।
हर बच्चे का किनार हूं मैं।
हर बुजुर्ग का सहारा हूं मैं।
धलते दिन के बाद की सुबह हूं मैं।
हाँ उम्मीद हूं मैं।
न छोड़ना मेरा साथ कभी,
किसी रोज तो मिलने आउंगी मैं।
मुझ पर तो सृष्टि कायम है।
हर एक की कश्ती की मांझी हूं मैं।
हाँ उम्मीद हूं मैं।
By Mona Mamtani

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