उम्मीद
By Priya Diwan
ये रिश्ते बड़े ही नाज़ुक होते हैं,
उम्मीद की राह पर चलते रहते हैं।
ऐसा कोई रिश्ता नहीं जहां उम्मीद ना हो,
और उन्हीं उम्मीदों के टूटने का गम ना हो।
जीवन साथी से हर राह पर साथ होने की उम्मीद,
मां-बाप से हर सुख सुविधाओं की उम्मीद,
बच्चों से अपनी कही हर बात मानने की उम्मीद,
दोस्तों से हर गलती छुपाने में साथ देने की उम्मीद।
पर जब यही उम्मीद टूट जाती है,
तब अक्सर रिश्ते भी टूट ही जाते हैं।
इसलिए उम्मीद रखो तो सिर्फ खुद से,
पूरी हुई तो सफलता तुम्हारी है,
और ना हुई तो कोई गम भी नहीं।
By Priya Diwan

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