उफ़! तेरी सादग़ी
Updated: Jun 9, 2023
By Nalini Choudhary
उफ़! तेरी सादगी भी क्या कुछ कह जाती है
बला की शोख़ियों से मेरी,जीभ थरथरा जाती है
तेरी बाहों में किताबें हुस्न की जागीर बन जाती हैं
तू हँसे,तो गुलशन की नुमाइंदा बन जाती है
तेरी नक़्शे चाल निग़ाह-ए-नाज़ का सबब बन जाती है
अल्फ़ाज़ कहाँ से लाऊँ,जब तू गहरा काजल लगाती है
दीदार करूँ जो तेरा, मन का तसव्वुर बन जाती है
ज़बान-ए-हाल बयाँ करती नज़रें,मेरी हुक़ूमत बन जाती हैं
By Nalini Choudhary

Comments