उठो-जागो यारो दो पल की ये जिन्दगानी है
By Ateet Maurya
मंजिल दूर खड़ी है, ठोकर राहों में पड़ी है,
तो क्या हुआ? क्या ये बात नयी है!
जीवन एक सफर, हम एक मुसाफ़िर है,
उठो-जागो यारों ,दो पल की ये जिन्दगानी है।
क्या हुआ था कल? क्या होगा अब कल?
छोड़ो ये सब बाते, ये आज तुम्हारा है।
मिट गये पद चिह्न, जिन राहो पर चलकर आये हो,
अब तुमको खुद की राह नयी बनानी है।
स्वरक्षण में किस्मत को शब्द-बाण मारे है,
इसी में बीत गये, न जाने कितने वर्ष तुम्हारे है।
आँखों में पानी लेकर ,ना ऐसे बरसात करो तुम,
आओ यारो आगे आओ, फिर प्रहार करो ना तुम।
रोम-रोम पुलकित हो, ऐसे जज्बात भरो तुम,
ऐसे ही ना बैठो, अब उड़ने की बारी है।
उठो-जागो यारों ,दो पल की ये जिन्दगानी है।
उठो-जागो यारों ,दो पल की ये जिन्दगानी है।
By Ateet Maurya

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