ईमानदारी
By Anishka Majethia
वैसे तो है ये केवल ५ अक्षरों का शब्द
जो दिखे ज़्यादा उनमें जिनके पास हो ऊँचे पद,
पदों को लेकर भारत में बड़ी ऊँच-नीच
मगर आम आदमी लटक जाता है इन दोनों के बीच,
हाँ, मैं बात कर रही हूँ उसकी जिसे कहते है ईमानदारी
जिसके स्थान पर अब हर ओर व्याप्त है रिश्वतखोरी,
अपराधी होते है सारे वो रिश्वत लेने वाले
अपितु उनसे भी बड़े गुनहगार होते हैं रिश्वत देने वाले,
बेईमानी और भ्रष्टाचार फैला रहा है अपने पंख ऐसे
गीदड़ शान से अपने शिकार पर निकला हो जैसे,
छोटे-बड़े स्त्री-पुरुष सब बन रहे है शिकार इसका
खासकर वो, पैसा हो भगवान जिसका!
धीरे-धीरे कर रहा है ये देश को खोखला
अगर भुगतने पड़े दुष्प्रभाव इसके तो मत जाना बौखला,
बेईमान के साथ ईमानदार की हालत भी खस्ता है
आखिर गेहूँ के साथ धुन भी तो पिसता है...
अगर ऐसा चलता रहा तो क्या होगा इस देश और जवानो का
अगर नाश नहीं किया बेईमानी और बेईमानों का ?
अपराधी नरम गददों पर और निर्दोष काल कोठरी में सोएगा
और देश हर पल अपना अस्तित्व खोएगा !
बंद करो गैरकानूनी काम, बंद करो रिश्वत लेना
सज़ा दो उन्हें और उन्हें भी जो चाहे रिश्वत देना,
गलत तरीके से कमाया गया सारा धन है काला
बर्बाद होगा देश भी और उसे मंजूर करने वाला,
ये न भूलो कि ईमानदारी में ईमान भी आता है
अपना कर्म घूम-फिर कर अपने पास ही तो आता है,
जिस दिन अमीर-गरीब के अपराध देखे जाएँगे एक समान
उसी दिन हकीकत में बनेगा ‘हमारा देश महान’ !!!
By Anishka Majethia

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