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इज़हार

Apr 28, 2023
2 min read

By Suruchi


पहली नज़र का पहला प्यार तो नहीं थे आप

पर जो था आपसे वो प्यार से कम नहीं था

वो ज़्यादा था,

वो ज़्यादा था आसमान में तारों की तरह,

महलों में गलियारों की तरह,

समुद्र में किनारों की तरह,

जिनमे फूल खिले उन बहारों की तरह,

हिमालय के ऊंचे पहाड़ों की तरह,

दुनिया के अनगिनत नज़ारों की तरह,

आपसे प्यार नहीं था पर आपको चाहा था

चाहा था, जैसे आँखे चाहती है गुलाब को,

चकोर चाहती है मेहताब को,

प्यासा चाहता है आब को,

शराबी चाहता है शराब को,

एक आशिक़ चाहता है अपने ख्वाब को,

जैसे हम चाहते है आपको,

हमने बताया आपको हमें आप पसंद हैं,

बताया था हमने,

जैसे नदियाँ बताती है सागर को उसमें मिलकर,

कलियाँ बताती है फूलों को खिलकर,

फूल बतातें हैं हवाओं को उनके आने पर हिलकर,

बाती बताती है लौ को उसमें जलकर,

हमने बताया था आपको आपकी मुस्कुराहट पे पिघल कर,

पर हाँ नहीं की आपने तो दोस्त बोले भूल जा,

कैसे भूल जाऊँ, कैसे भूल जाउँ

जब दिखते हैं आप,

कॉलेज के गलियारों में,

सड़क पर जा रही कारों में,

हफ्ते के 6 वारों में,

जो हमेशा घूरते रहते हैं आपके उन यारों में,

जब कोई किसी को मना करे तो उन इनकारो में,

इन्तेज़ारों में,

आपके classroom की खिड़की पर बन रहे आकारों में,

कैसे छोड़ दूँ, कैसे भूल जाऊं आपको

जब दिखते हो आप मुझे

हर किसी में, सारे के सारों में




Translation


पहली नज़र का पहला प्यार तो नहीं थे आप

पर जो था आपसे वो प्यार से कम नहीं था

वो ज़्यादा था,

वो ज़्यादा था आसमान में तारों की तरह,

महलों में गलियारों की तरह,

समुद्र में किनारों की तरह,

जिनमे फूल खिले उन बहारों की तरह,

हिमालय के ऊंचे पहाड़ों की तरह,

दुनिया के अनगिनत नज़ारों की तरह,

आपसे प्यार नहीं था पर आपको चाहा था

चाहा था, जैसे आँखे चाहती है गुलाब को,

चकोर चाहती है चाँद को,

प्यासा चाहता है पानी को

शराबी चाहता है शराब को,

एक आशिक़ चाहता है अपने ख्वाब को,

जैसे हम चाहते है आपको,

हमने बताया आपको हमें आप पसंद हैं,

बताया था हमने,

जैसे नदियाँ बताती है सागर को उसमें मिलकर,

कलियाँ बताती है फूलों को खिलकर,

फूल बतातें हैं हवाओं को उनके आने पर हिलकर,

बाती बताती है लौ को उसमें जलकर,

हमने बताया था आपको आपकी मुस्कुराहट पे पिघल कर,

पर हाँ नहीं की आपने तो दोस्त बोले भूल जा,

कैसे भूल जाऊँ, कैसे भूल जाउँ

जब दिखते हैं आप,

कॉलेज के गलियारों में,

सड़क पर जा रही कारों में,

हफ्ते के 6 वारों में,

जो हमेशा घूरते रहते हैं आपके उन यारों में,

जब कोई किसी को मना करे तो उन इनकारो में,

इन्तेज़ारों में,

आपके classroom की खिड़की पर बन रहे आकारों में,

कैसे छोड़ दूँ, कैसे भूल जाऊं आपको

जब दिखते हो आप मुझे

हर किसी में, सारे के सारों में


By Suruchi





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