इस नए साल
By Nazia Bano
इस नए साल कुछ काम अब नए होंगे , हम वही होंगे मगर अंदाज़ नए होंगे
साल दर साल हर साल बदलने वाले , फिर नहीं आते कोई साल गुज़रने वाले
लम्हा दर लम्हा ये उम्र खर्च होती रही , सब्ज़ हर ज़ात मुसलसल ज़र्द होती रही
हर नए साल होता है नया कुछ भी नहीं , वक़्त है रेत मेरे हाथ रहा कुछ भी नहीं
हर दिन का हर रात का हर अमल का भी , हिसाब देना है आने वाले और गुज़रे हुए कल भी
सबब हों मुस्कराहट का और तोड़े गए दिल का भी , खुदा शाहिद है हर ज़ुल्म और हुस्ने अमल का भी
फुर्सतों के मोहताज रिश्तों से , मोहब्बतों से बेज़ार रिश्तों से
खुद को आज़ाद करना है,
दिल के शफ़्फ़ाफ़ रिश्तों से , सच्चे दो चार रिश्तों से
खुद को आबाद करना है
वो कुछ रिश्ते जिनसे मंसूब किया है खुद को, चाह से फ़िक्र से अब उनको संवारा जाये
रू ऐ हस्ती से कुछ क़र्ज़ उतारा जाये ,अब शबो रोज़ ज़रा सजदों में गुज़ारा जाये
तमाम उम्र असबाबे तबीयात ही कमाते, तसकीने रूहो दिल के लिए रब को पुकारा जाये
अक्स ए हयात में कुछ रंग अब नए होंगे , हम वही होने मगर अंदाज़ अब नए होंगे
इस नए साल कुछ काम अब नए होंगे, इस नए साल कुछ काम अब नए होंगे
By Nazia Bano

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