इंसानियत
By Ami Mehta
अचानक एक कोने से रोने की आवाज़ आई
मैंने पूछा, तुम्हारा नाम क्या है भाई?
उसने कहा, मुजे एक इंसान ने धूतकरा है
उसने एक झूठे मुखोटे का सहारा लिया है
आज कल ज़्यादातर इन्सानो की यही तो खासियत है
मेरा नाम इंसानियत है।
मैंने कहा, घबराओ नहीं आज भी थोड़ी सी इंसानियत बची है
दया दिखने मे अभी भी लोगो की थोड़ी सी रुचि है
उसने कहा, बड़ी अनोखी है तुम्हारी आंखे जो तुम्हें ऐसे लोग दिख
जाते है, वरना मे तो जहा पर भी देखू, मुजे देखकर तो लोग छिप ही
जाते है।
मैंने कहा, साहस तो इंसानियत की पहेछन दिखती है
बिना कुछ बोले जीने का अंदाज़ सिखाती है
उसने कहा, लगता है तुम एक भ्रम मे जी रही हो
पूरी तरह से जगी नहीं अभी भी सो रही हो
तुम्हारी बातों से आशा की एक किरण छलक़ती है
ज़्यादा उम्मीद मत रखना, ये दुनिया मतलब की भाषा ही बोलती है।
उसकी बातों ने मुजे बड़ा ही आश्चर्यचकित किया
मेरे मन मे शंका ने घर कर लिया
मे सोचती रेह गई की उसे क्या कहु, तब तक तो उसने दम तोड़ दिया।
By Ami Mehta

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