इंसान
By Sonu Sharma
ऐसा नहीं है की इंसान जानता नहीं है
ये बात है जुदा की बस मानता नहीं है
ज़िन्दगी का दिया है बिन तेल, और हवाएं बेईमान है
ना जाने किस बात का, फिर भी घुमान है
मिट गए है कितने तख्त, कहाँ बस्तियां गयी
जा जाने किस गर्त में वो हस्तियां गयी
जीत लूंगा सारी दुनिया ये इसका अहम है
इंसान की बुनियाद का ये कैसा वहम है
By Sonu Sharma

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