इंतज़ार
By Vanshika Singh
घड़ी के इंतजार में
उससे मिलने के इंतजार में
ऐसे ही दिन रात बीत गए,
उस शख्स के इंतजार में।
इंतजार है उसका
इंतजार है उस पल का
जब घड़ी नहीं मैं चलूंगी
थामे उसका हाथ चलूंगी
जाने कब वो इंतजार पूरा होगा
जाने कब वह मेरे पास होगा
उसने कहा वक्त लगेगा पर आऊंगा जरूर,
तेरे हाथों पर अपना नाम लिखूंगा जरूर,
तुझे अपना बना कर अपनी बाहों में लिपटाकर
कभी दूर ना जाने दूंगा
कसमो से, वादों से, रिश्तो से,
अपना बनाकर रखूंगा।
कहां गए वो पल?
अब उन्हीं पलों का इंतजार है
कहां गई वह बातें
वह कसमे वो रिश्तों की बुनियादें
जिसमें संजोते थे हम अपने दिलों की बातें।
तेरे इंतजार में आंखें राह देख रही
तूने छूने को हतेलिया तरस रही ।
बस इंतजार है और एक आस है
कि तुम आओगे
मेरी गलियों को मैं कहोगे और
फिर कभी छोड़कर नहीं जाओगे,
कह दोगे वह बातें
जो अब तक अनकही थी
तेरे लिए दिल की धड़कने अब तक थमी थी
उसी गली में बैठे इंतजार करते हैं तेरा जहां तू छोड़ कर गया था
आकर देख मेरे दिल के मुसाफिर,
आज भी हम तेरे दिल के फकीर है,
तेरी ही यादों में जीते हैं
सोते-सोते बस एक ख्याल आता है कि काश कि काश कल तुम हमे मिल जाए
और इस जिंदगी का सफर तेरी बाहों में ही खत्म हो जाए।
By Vanshika Singh

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