आज़ादी
By Y. Deepika
ये जो हम आज़ादी का जशन मनाते है,
वो हख हमे किसने दिया, कैसे मिला ?
किसी ने अपनों को अपने आखों के सामने मरते हुए देखा,
तो किसीने एक वक़्त कि रोटी के लिए अपना मान बेच दिया।
किसी ने थोड़ी सी पानी के लिए खुद के ज़िन्दगी पर उन अंग्रेज़ों को हख देदिया,
तो किसीने ज़िंदा रहने के लिए उन अंग्रेज़ों के साथ मिलकर अपने ही भाईयों को मार दिया।
किसीने अपने घर को जलते हुए देखा,
तो किसीने अपनों को फांसी पर चढ़ते हुए देखा।
किसीने अहिंसा का रास्ता चुना,
तो किसीने क्रन्तिकारी होने का रास्ता चुना।
किसीने छोटे और मासूम बच्चों को मरते हुए देखा,
तो किसीने बेकसूरों को अंग्रेज़ों के गुस्से के आग में जलते हुए देखा।
हम ऐसी कगार पे थे कि लाशों के ढेर से पूछ रहे थे कि "कोई ज़िंदा है ?"
दुःख इस बात का है कि आज कि ये पीढ़ि उनके ज़िन्दगी कि, उनकी आज़ादी कि कीमत जानते नहीं।
ये नहीं जानते कि कितने जान कुर्बान करने पर ये आज़ादी मिली।
आज़ादी सिर्फ एक जशन या त्यौहार नहीं है।
आज़ादी वो इज़्ज़त है, जो हम हर उस इंसान को देते है जिसने इस पीढ़ि कि आज़ादी के लिए उस वक़्त जान गवाई।
आज भी आपकी जान कि कीमत वो हर उस इंसान कि जान है जो सरहद पर इस अनजान कि जान के लिए खुद को शहीद करने के लिए तैयार है।
अपनी ज़िन्दगी कि कीमत जाननी है तो अपनी देश कि चरित्र को देखो।
जय हिन्द।
By Y. Deepika

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