आज़ाद पंछी
By Yati Manglik
जाना तुझे पाकर, मेरा जाना आसान नहीं
तेरा मुझसे और मेरा तुझसे आसमान कहीं।
तू बड़े, तू उड़े, तू चले लहरों को चिर चले,
तू रुके या गिरे, तो संभाले तेरा धीर तुझे।
तू सही को सही और गलत को गलत कहे,
तू ना को नहीं अपनाए और हौसलों को लगाए गले।
ना तू समझौते करे, न ले आसान डगर कभी,
तू सशक्त बने और ना डगमगाए कभी।
तेरी जीत भी तेरी, स्वीकारे तू अपनी हार भी,
लगाम ले हाथों में, संभाले धार तू ही।
झुकना पड़े तो तेरा स्वाभिमान ना डिगे,
तू अपने रिश्ते खुद चुनें और निभाई भी खुद ही।
By Yati Manglik

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