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आसमान का अकेलापन

Dec 18, 2024
1 min read

Updated: Jul 18, 2025

By Payal K Suman


तुझ तक पहुंचने में नाकाम हूं मैं

मेरे चांद तेरी रोशनी से अनजान हूं मैं

कल तक जिस बात पर गर्व था मुझे

आज उसी बात से परेशान हूं मैं

देखो तो है सब कुछ मेरा

फिर भी सबसे दरकिनार हूं मैं

पता नहीं क्यों अंतहीन,असीमित

खाली पड़ा खलिहान हूं मैं

अपने आकार, रंग-रूप से

खुद ही तो अनजान हूं मैं

दूर हैं मुझसे नभ और तारे

समझो तुम शमशान हूं मैं

अकेलेपन की पूर्ण व्याख्या,

या कहो सारांश हूं मैं

छूना चाहे जिसको दुनिया,

हां वही आसमान हूं मैं।


By Payal K Suman



 
 
 

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