आसमां मेरी जद में
Updated: Sep 16, 2025
By Anita Singh
ऐ मिट्टी के परिंदे अपने पंखों को खोल दे, उड़ान तेरी क्या है जमाने को बोल दे, क्यों छुपाकर के बैठा है तू पंखों को अपने, पोंछ ले अपने आंस, पूरे कर सारे सपने, अपने पंखों पर फैली काई को पोंछ दे, उड़ान तेरी क्या है जमाने को बोल दे। चीरकर आंधियों को आसमां की उड़ान ले, अपने हौसलों को एक नया मुकाम दे, मायूसियों को छोड़कर हिम्मत से काम ले, दुनियां की फिक्र छोड़कर बस रब का नाम ले, हर हद को लांघ जा अपने सपनों को मोल दे, उड़ान तेरी क्या है जमाने को बोल दे।
By Anita Singh

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