आवाज़ एक दिल की।
By Riddhi Dhandha
मौसम था खुशियों का , जब आए मेरी जिंदगी में तुम, उजाला ही था हर तरफ. तुम्हारा प्यार था मेरी ताकत , लड लेती सारी दुनिया से मै. सीख गई थी मै , खुश रहना तुम्हारी मुस्कान में, दुःख तुम्हे मिलता आंसु मेरे बहते. गलत नहीं ये कहना , तुम जान बन गये थे मेरी, अपना जीना ही भूल गई थी मै, बस तुम ही थे मेरी दुनिया. पर एक दिन चले गए तुम , मेरी जिंदगी से अचानक, सारा प्यार भूला के. दुनिया बिखर गई मेरी, सांस ही रुक गई मानो, कैसे जीयु क्यु जीयु, मर जाना ही सही लगा.
पर अचानक एक आवाज, आई अन्दर से, हमारा इतना किमती प्यार क्यूं किसी पे लुटाए, जो हमें किसी स्वार्थ के लिए चाहे, और छोड़ भी दें, इस से अच्छा है खुद को ही, प्यार करो इतना कि नहीं चाहिए और कोई. बुलंद बनो इतना कि, गुंज उठे आवाज सारी दुनिया में, अपनी जान लगा दो सारी, नया सीखने में. किसी को हक ना दो, तुम्हे दुःखी करने का, आबाद करो अपनी दुनिया को, अपने ही प्यार से. अपने आप से और , अपने माता पिता से ही प्यार करो, वहां से बिन शर्ति और सचा प्यार मिलता है. अपना समय ऐसे लोगों के, पीछे बर्बाद ना करें, जीनको आप की कद्र नहीं. अपना समय नया, सीखने में व्यतित करो, दुखी लोगों को हंसाने में व्यतित करो. कुछ नया सीखते, नया हासिल करने में, जो सुकून मिलता है, वहीं आपको संपुणॅ बनायेगा. याद रखो कोई और आप को, संपुणॅ नहि बनायेगा, खुद आप ही आप को संपुणॅ बना सकते हैं. मत बनो और एक श्रद्धां. इस देश को, समाज को जरूरत है, रानी लक्ष्मीबाई की, जो लड जाए अपनी मातृभूमि के लिए, बस यही आवाज है हर दिल की.
By Riddhi Dhandha

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