आयुष्य ( मराठी )
By Amit Jadhav
झेप आकाशी नाही आसरा
समुद्रकिनारी घर पाणी खारटा
खिशात पगार किती उधार
जीव शेतकरी कोरड वावर
अतुट प्रेम अंत प्रेमभंग
देव कृष्ण नशिबी कुरुक्षेत्र
संसार शाळा जगणं परीक्षा
जन्माचा राम भाग्य वनवास
शत्रू अनेक नातं कोणत
मामा शकुनी दुर्योधन मित्र
लाभतो कर्ण एक अभिमन्यू
शेवट दोघांचा आहे ठाऊक
घडत असतो असाच आयुष्य
तुझा रामायण माझा महाभारत
जीवन ( हिंदी )
समुद्रतट पर घर पानी नमकीन
छू लिया आसमान आश्रय नहीं
जेब मे पगार , है थोड़ी उधार
खेत सुखा अगर में किसान
अटूट गर प्रेम , क्यों अंत प्रेमभंग
भगवान थे कृष्ण भाग्य कुरुक्षेत्र
दुनिया एक पाठशाला , जिना परीक्षा
पुरुषोत्तम थे राम क्यों किया वनवास
मामा शकुनी , क्यों दुर्योधन सा मित्र
असंख्य है दुश्मन संबंध ढूंढो कोनसा
तलाश कर्ण-अर्जुन की , क्या गलत वो नहीं
ठुकरा गया था रावण , एक भूल के लिए
क्यों दोष जीवन को
यही तो जीवन है !
किसी रामायण का किरदार तू
किसी महाभारत का किरदार में
By Amit Jadhav

Comments