आध्यात्म...
By Dr. Suboohi Jafar
आध्यात्म प्रेम है, निराकार है, शाश्वत है,
प्रेम का वह अनुबंध है, जो कण- कण में व्याप्त है,
यह प्रकृति का संगीत है, जो अविरल है,
एक दिव्य नाद है, जिसकी गूँज अत्यंत सरल है|
आध्यात्म का मतलब होता है, आत्मा का ज्ञान,
स्वयं की स्वयं से पहचान,
और इस पहचान के पश्चात् होता है जीवन दर्शन,
वह दर्शन जो अदृश्य है, किन्तु दिखाई देता है|
आध्यात्म आत्म दर्शन है, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में विद्यमान है,
इसका आकलन नहीं हो सकता, ये सर्वस्व विराजमान है,
जैसे ही प्रेम की भाषा ह्रदय से मस्तिष्क तक पहुँचती है,
आत्म तत्त्व का अवलोकन होते ही, ज्ञान बोध हो जाता है|
हे मनुष्य! आडम्बर के जाल में फँस कर, भूल मत आध्यात्म को,
विधियों के विधान के मोह में, भूल मत विद्या को,
कर्मकाण्ड में उलझ कर, भूल गए हम साध्य को,
क्यासत्यहै, क्याअसत्य, खंगालज़राअंतर्मनको|
By Dr. Suboohi Jafar

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