आधी आधी सी रात है
Updated: May 31, 2023
By Anuja Sharma
आधी आधी सी रात है,
धुआं है,
खाली सा रास्ता है,
और उलझे उलझे से हम हैं।
कोई हो बुनकर
तो आए,
और सुलझाए,
इससे पहले की ये रेशम
राख हो जाए।
जब कह नहीं पाते,
तो लिख देते हैं,
जो कि सदा की ही बात है,
आधी आधी सी रात है।
शाम होते ही,
दिल में टीस सी उठती है,
जैसे कि आकाश
हमेशा के लिए विदाई ले रहा हो,
एक खत छोड़ जाता है,
सितारों से बंधा हुआ,
उसे क्या फर्क मेरी क्या जात है,
आधी आधी सी रात है।
कुछ अजीब है ये मन,
पूरे चांद से बातें करता है,
उसे राज़ भी बतलाता है,
और उससे रो कर भी आता है
ऐ मेरे मन!
क्यों तुम में अलग सी हयात है?
आधी आधी सी रात है।
By Anuja Sharma

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