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आजादी

By Asha Jaisinghani


डॉक्टर -बाई (चन्दा से)मैंने। तुम्हें कितनी दफा कहा है कि तेरे बेटे (संतोष को इलाज की नही परहेज़ की जरूरत है ध्यान रखों कि इसके आस-पास गंदगी ना हो , धूल -मिट्टी ना हो इसको एलर्जी है और एलर्जी  का बचाव ही इलाज है।

चंदा - साब आप तो जानते  ही हो हम कँहा रहते है ,घर में तो मैं सफाई का पूरा ध्यान रखती हूँ ,मगर उस नासपिटे (ठेकेदार)का क्या क्ँरू जो गाडिय़ां भर-भर के हमारी गली मे कचरे का ढेर लगा जाता है ।मखि्खयाँ ,मच्छर और बदबू के मारे जीना मुश्किल है ,मजबूर है (हाथ जोडकर )कोई अच्छी दवा लिख दो पर मंहगी नहीं (सकुचाते हुए)बस बच्चे को आराम मिल जिये ,सारी -सारी रातं खांसता रहता है ।

डॉक्टर (पर्ची लिखते हुए)इसिलए  तो कह रहा हूँ ,इसका ध्यान रखो संतोष की खांसी इसके बापू जैसी है ।

चंदा (काँपते हुए) नहीं -नही डॉक्टर साहब ऐसा मत बोलो ,अब ये ही है ,इसके बापू तो चले गये (स्वर्वगस )अब यही सहारा है ।

डॉक्टर - मैंने दवाई लिख दी है अगर आराम मिल जाए तो ठीक वर्ना भर्ती करना पडे़गा ।

चंदा  - (उदास होकर)पर्ची लेतीं है और दवाई लेकर घर जाती हैं।

संतोष - (खासते हुए)अम्मा थोड़ा धीरे चलो ,मुझसे चला नहीं जा रहा ।

चंदा -( संतोष को देखती हैं, वो हाफ रहा था) फिर उसे गोद में उठाती है ,और तेज -तेज चलती है और घर पँहुचकर जल्दी -जल्दी संतोष को खाना खिलाती है ,और दवाई देकर उसे आराम करने को कहती हैं।फिर, बबुआ अब थोडी़ देर  में आराम आ जाएगा मैं काम पर जाती हूँ ,मेमसाब की आँफिस जाने का टेम हो गया है ।

संतोष - (खाँसते हुए)मत जाओ अम्मा ।

चंदा - नहीं बबुआ काम पे नहीं जाउँगी तो ,खाँएगे क्या ?

तभी , ठेकेदार का आदमी कचरे की गाड़ी खाली करने लगता हे ,और और चिल्लाती है ,और डण्डा दिखाते हुए कहती है ये गाड़ी तुने कभी यँहा खाली करी है तो इस डण्डे से पिटूँगी।

ठेकेदार का आदमी -सरकारी आर्डर है ,कचरा यहीँ डालना है,बड़ी आई डण्डा लेकर ,चल निकल यँहा से चंदा  चुपचाप ठण्डा लेकर अंदर आती हे ।

चंदा -  संतोष को कहती है मैं काम पर जा रही हूँ ,ज्यादा तबियत खराब हो। तो तो बादामी को बुला भेजना मैने उसको कह दिया है ,आज उसको कह दिया है तेरे पास बैठी रहेगी और चली जाती हैं ।

चंदा काँलबेल बजाती है

मिसेज सेठी - आ गई ,सच्ची तुने तो बडा परेशान कर रखा है ,दो  दिन बाद आईं है और वो भी इतनी देर कम से कम फोन तो कर देती  ,फालतू मेरी छुट्टी लगवा दी?

चंदा - मेमसाब संतोष की तबीयत खराब थी घर मे ओर कोई है नहीं बच्चे को किसके भरोसे छोड़ आती फोन करने  की तो सूझी ही नहीं ,आज भी पडो़सन को बोलकर आई हूँ।

मिसेज सेठी -  (गुस्से से) तेरे  रोज - रोज के बहाने सच्ची जिस दिन मुझे दूसरी बाई मिल गई छुट्टी ,तेरे चक्कर में मै न घर की न आँफिस की।

 तभी चंदा का मोबाइल बजता है ।

चंदा - हैलो

बादामी -  अरी चंदा तु् जल्दी आ जा (घबराते हुए )संतोष की तबीयत ज्यादा खराब हो गई हैं ,मै उसे अस्पताल लेकर पँहुचती हूँ तू भी वँहा पँहुच ।

चंदा कुछ बोलती उससे पहले ही"

 मिसेज सेठी - तू अभी की अभी निकल ,और फिर कभी मेरे घर मत आना, " क्या राम ,सच्ची तुने तो बडा़ परेशान कर रखा है ।


चंदा - नहीं -नहीं मेमसाब मै जल्दी आ जाँऊगी ,मेमसाब मुझे कुछ एंडवास दे दिजिए संतोष को भर्ती कराना होगा।

मिसेज सेठी - काहे का एडवांस ,कुछ नहीं मिलेगा, तू निकल यँहा. से और फिर कभी मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना।

 चंदा उदास होकर. चली जाती हैं। एक स्कूल टीचर से उधार लेकर अस्पताल पँहुचती संतोष की हालत देखकर उसकी आँखों मे आँसू आ जाते है। तभी संतोष को देखकर डॉक्टर इस  मरीज के साथ कौन है ?

चंदा - जी  डॉक्टर साहब

डाक्टर - अभी संतोष को दवाई दे दी है , बाकि कुछ टेस्ट हुए  है।

2 दिन बाद थोड़ा आराम मिलता हैं  चंदा डॉक्टर को को अपनी पैसे की तंगी के बारे मे बताती है । डॉक्टर दवाई लिखकर देते है चंदा संतोष को घर ले आती हैं

अगले दिन चंदा जल्दी - जल्दी काम निपटाती  और संतोष को दवाई और खाने - पिने सेवा-चाकरी में लगी थी कि पडो़सन कमली आई और कहने लगी अरे चंदा बस्ती के। गोल चक्कर पर पँहुच वँहा कुछ मैडम आयीं है कह रही है सारी औरतों कौ बुला लाओ कुछ जरूरी बात करनी है।

चंदा - कमली तू जा ,मेरे पास टेम नहीं है फालतू मग़जमारी कँरु अभी मेरे को जल्दी काम.पर जाना है नही तो मेमसाहब किसी ओर को काम पर लगा लेगी  कमली चली जाती है।

दोपहर को चंदा काम से लौट कर जल्दी जल्दी घर का काम निबटाती है ।,,तभी कमली आती है और उसके साथ तीन मैडम भी थी ,मैडम गोल चक्कर पर बहुत सारी औरतें   आई ओर जो नहीं आईं हम उनके घर जाकर समझा रहे है

बहनजी (हाथ जोड़कर)अभी अभी मैं घर में आई हूँ बहुत थकी हुई हुँ अभी घर का सारा काम पड़ा है आप चले जाईये , फिर मुझे बेटे को खाना  बनाकर खिलाना  है ।

मैडम-मुझे पता है बाई जी  ,पर आपके भले की ही बात है कि हम और हमारी सरकार आपका जीवन स्तर  ऊंचा उठाने के लिए कोशिश करते रहते हैं और वह भी अगर आपका सहयोग मिलेगा तो आपका ही भला होना है। 

 मैडम  - आप अपनी परेशानी बताइए हो सकता है कि हम आपकी कुछ मदद कर सके हमारी संस्था हमेशा आप जैसे लोगों की मदद के लिए ही तैयार रहती है ।

चंदा - अच्छा मैडम जी आप  कहीं काम दिला दो मेरा बेटा बीमार है कमाने वाली मैं हूं ।(फिर एकदम से ) क्या आप ठेकेदार को क्या आप ठेकेदार को यहां से कचरा डालना बंद करवा सकती हो वर्ना आप जाओ  हम पहले ही परेशान हैं दूसरी बातें  सुनने का टाइम नहीं है हमारे पास कितनी बार ठेकेदार के आदमियों को बोला है भाई यहां कचरा मत डालो हम हमारे बच्चों सब के सब आये दिन बीमार  हो जाते हैं । पर कोई हमारी बात सुनता ही नहीं।( ठेकेदार से कहिए) कचरा शहर के बाहर कहीं दूर जाकर फेकें । और वह रोने लगती है आदमी को तो इस बीमारी में खो दिया अब बेटे को खोलने की हिम्मत नहीं है ऊपर वाला भी हमारी परिक्षा लेकर  , थकता नहीं है आखिर हम भी इंसान हैं कब तक सब्र करें और फिर फफक कर रोने लगती है किसी तरह ठेकेदार को समझा दो मैडम रोज की कहानी है आप ही देखो कितनी बदबू आ रही है  घर में  तो सफाई का ध्यानं रख लें , लेकिन  कचरे का पहाड़ हटाना  हमारे बस की बात नहीं है , मैडम थोड़ी देर खामोश रहती है  फिर कहती है तुम फिक्र मत करो मै 2-4 रोज में पता करके बताती हूँ ,क्या हो सकता है ,और चली जाती है।

पाँच रोज बाद मैडम आती है 

 रामदुलारी औरतें हैरान रह जाते हैं और देेखती  हैं ः

चंदा  - अरे मैडम जी आप मैं तो समझी थी कि आप भूल ही गए होंगे ।

मैडम - तुम्हारा बेटा ठीक हैः

 चंदा - हां अब फायदा है ।

 मैडम - तुम्हारे लिए खुशखबरी है "सब हैरानी से मैडम को देखती है !

नगरनिगम और स्मार्ट सिटी ने वैस्ट मैनेजमेंट दोनो मिलकर  शहर में ट्रेचिंग ग्राउंड में मशीने लगाकर कचरा मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी के माध्यम से गीला खुखा कचरा अलग करेगी मशीनो से कार्बन क्रैडिट को बेचकर कमाई भी कर सकेगें और स्मार्ट सिटी को इससे लगातार कमाई होगी  और तुम्हारी परेशानी का हल भी निकल गया । बस कुछ समय लगेगा ।

सब सुनकर हैरान हो जाते है

चंदा -मैडम ये सब आपने किया है ?।

मैडम अरे नही ,ये सरकारी और स्मार्ट सिटी योजना में शामिल है वो सरकार बाद में करती ,हम पिछे पड़ गये ,रोज चक्कर लगाते अब वो कचरा साफ करने की मशीने जल्दी यानि पहले लगाने पर राजी हो गई हैं ।बस 20 -25दिनो की बात है ।सब खुश हो जाते  है ,अब गंदगी, कचरे और बदबू से निजात मिलेगी ।और मैडम चली जाती है ।

करीबन डेढ़ महिने बाद एक दिन मैडम आती और कहती है

,  तुम सबको उस कारखाने में ली जाने आई हूं कि तुम खुद देख लो और सब मैडम  के साथ मिलकर कारखाने पहुंचती है वहां कचरे का इतना उपयोग देखकर दंग रह जाती हैं और मैडम कुछ लोगो को तो काम भी दिलवा देती है , अब धीरे-धीरे बस्ती की रंगत बदलने लगती है सड़कें अब साफ और चौड़ी लगती है और तो और पहले की अपेक्षा  बस्ती में अब  कम लोग बीमार पड़ते है ।  

एक  दिन बस्ती के कुछ लोग मिलकर "एन.जी.ओ " ऑफिस में मैडम के पास जाती हैं और उनको धन्यवाद कहती हैं मैडम उनको तिरंगा देती है और कहती है कि परसों 15 अगस्त है बस्ती में झंडा फहराना मत बुलना  इस दिन हमारा देश आजाद हुआ था उसकी खुशी मनाएंगे  उनको याद करना  गई और  जिन्होंने हम को आजादी दिलाई हम उनको याद करेंगे

चंदा  -  मैडम जी आप देश की आजाद का दिन मनाना  , हम तो कचरे और गंदगी से आजादी का दिन मनाएंगे और झंडे को देखती  है


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