आज ख़ुशी को मैंने उड़ते देखा
By Ajay Kumar
आज खुशी को मैंने उडते देखा,
हवाऔं में, मचलते देखा,
मन किया कि पुछूं कहां चली,
फिर संग किसी को चलते देखा।
आज खुदी को मैंने जलते देखा,
जब रंग किसी को बदलते देखा,
सोचा पूछ लूं कि बात क्या है,
फिर घर किसी का बसते देखा।
आज फिर उसे जो हंसते देखा,
तो दिल को जरा संभलते देखा,
वो खुशबु सी थी, हवा हुई,
ओर मिट्टी को मिट्टी में मिलते देखा।
By Ajay Kumar

Comments