आज़ादी मुकम्मल नहीं।।…
By Abhimanyu Bakshi
ज़ंजीरों ने नहीं मँफी जज़्बातों ने जकड़ रखा है,
छोटे-बड़े, अमीर-गरीब के पैमानों ने जकड़ रखा है।
ये हिंदू है ये मुस्लिम ये सिख है ये ईसाई,
इंसानियत को इन्ही बातों ने जकड़ रखा है।
मुख़ालिफ़ के हार जाने की दुआ करना आसान है न,
मेहनत के जज़्बे को इन्ही दुआओं ने जकड़ रखा है।
बट जाते हैं पल भर में सदियों पुराने यार यहाँ,
रिश्तों को ज़मीन के क़ब्ज़ों ने जकड़ रखा है।
भटकी नौजवानी को समझाने का वक्त है किस के पास,
सभी को अपने-अपने काम-काजों ने जकड़ रखा है।
हिंदी बोलेंगे तो पिछड़े हुए लगेंगे न,
हमारे ज़ेहन को विदेशी सभ्यताओं ने जकड़ रखा है।
राजा रणजीत सिंह महाराणा प्रताप तो अफ़सानों के किरदार हो गए,
क़स्बों को तो मतलबि नेताओं ने जकड़ रखा है।
हिंदुस्तान को आज़ाद हुए ७५ बरस हुए मगर,
हिंदुस्तानी को उसके ख़्यालों ने जकड़ रखा है।।…
By Abhimanyu Bakshi

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