आज लिखना है वो गीत
By Shweta Khati
आज लिखना है वो गीत,
जो स्वागत में तुम्हारे
गाए हर डाल
गाए, चर- अचर
जड़-चेतन
भुलाकर हर भेद
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में गूँजे जो
होकर एक ।
करने को अभिनन्दन
ओ करुणाकर,
जगा है संसार
कण-कण में छवि तुम्हारी
आलोकित तुमसे संसार ।
कृपा-निधान जब आओगे
होगा कौन-सा वेश?
फकीर-सा रूप धरोगे
निर्बल के हरने संताप
या फिर शूरवीर दिखोगे
धर्म-युद्ध में हारेगा पाप ।
जो भी होगा रूप
होगा शोभित पाकर तुमको
संरक्षक तुम जो दाता
तुम ही रक्षक बनना ।
गीत तुम्हारी प्रशंसा का
अधरों पर शोभा पाए
स्वागत में हो गीत ऐसा
हे जगदीश जो तुम्हें भाए।
By Shweta Khati

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