आज भी लगता है...
By Dr.Trupti Upadhyay
हररोज शाम आती है, पर अकेली नहीं होती ।
तेरी याद, तेरा इंतजार साथ लाती है ।
आज भी लगता है, तू कहेगा बोलो आज कहा है मिलना ।
आज भी लगता है, तू कहेगा घर पहोचते ही कोल करना ।
आज भी लगता है, तू कहेगा दवाई ध्यान से लेना ।
आज भी लगता है, तू कहेगा ठंड में बहार मत जाना ।
तूने ऐसी आदत लगाई थी अपनी कि ।
अब हमसे ही हमारी परवाह नहीं होती ।
हररोज शाम आती है पर अकेली नहीं होती ।
आज भी लगता है, तू यूही नाराज होगा ।
आज भी लगता है, तू जट से मान जाएगाँ ।
आज भी लगता है, तू पागल सा प्यार करेगा ।
आज भी लगता है तू हमेशा मेरे साथ रहेगा ।
तुझे क्या कहूँ की, तुझसे राबता यु बना है ।
अब मैं मेरे ही साथ नहीं होती ।
हररोज शाम आती है, पर अकेली नहीं होती ।
तेरी याद, तेरा इंतजार साथ लाती है ।।
By Dr.Trupti Upadhyay

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