आज फिर जाम छलकेंगे (Aaj Phir Jaam Chalkenge)
Updated: Dec 5, 2022
By Karan Handa
बेपरवा और शरेआम छलकेंगे
आज फिर जाम छलकेंगे !
जी चुका जितनी और जितनी मरना है बाकी
मेरी ज़िन्दगी के नाम छलकेंगे,
आज फिर जाम छलकेंगे !
मुंतज़िर है लाश मेरी,
यूँ बुझे-बुझे से क्यों बेकरार आ रहे हो
आखरी दफा मिलना है,
क्या मियाँ बिन शराब आ रहे हो !
जो नही पीते,
मेरे दर्द को अफवाह समझेंगे
आज फिर जाम छलकेंगे
बेपरवा और शरेआम छलकेंगे
आज फिर जाम छलकेंगे !
वो भी था वक़्त रंगीन
छुआ नही था जब तूने
मेरे होंठो को क्भी,
अब हर शाम है संगीन सी
ज़रा देखो खोल कर आँखे
मासूमियत मेरी और मेरी हँसी
महफ़िलो में नीलाम हो रही !
और पहले के इंतज़ार में
जाम आखरी पी लेंगे,
मरेंगे नही अगर तो कैसे जीएंगे,
आज फिर जाम छलकेंगे,
बेपरवाह और शरेआम छलकेंगे
आज फिर जाम छलकेंगे !
By Karan Handa

Comments