आज के मंजर
By Sarika Vishal Dabhade
कैसे अजीब यहाँ के हालात हो गए
जाने कैसे लोगों के ताल्लुकात हो गए,
चलते हुए राह के हमराही और हमसफर
जाने वो आज कहाँ खो गए,
कैसे वो अपनों से दूर हो गए ?
कितने अजीब से यहाँ के हालात हो गए...
सब कुछ है यहाँ , सबके पास
बस वक्त नहीं है, किसी के पास..
सब अपनी हसरतों में कुछ ऐसे खो गए
के रिश्तों में फासले काँटों सा चुभो गए..
कितने अजीब से यहाँ के हालात हो गए...
सारे नज़ारे क्यों दहशतों में सो गए
क्या है वजह, कुछ पता नहीं
हवाओं में है , एक घुटन सी बही
किनके इशारों पे ऐसे हादसे हो गए ?
कितने अजीब से यहाँ के हालात हो गए ...
हँसती गाती जिंदगी को
गम के सहरा में डूबो गए,
फरिश्ते कहलाने वाले
क्यों ऐसे दरिंदे हो गए ?
सुंदर हरी भरी धरा को,
खून की होली से भिगो गए ..
कितने अजीब से यहाँ के हालात हो गए ..
कितने अजीब से यहाँ के हालात हो गए....
By Sarika Vishal Dabhade

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