top of page

आज की नारी

Nov 14, 2022
1 min read

By Smita Mahto


आज की नारी, सब पर है भारी

निभाती आई है यह रिश्तों में साझेदारी

विकट परिस्थितियों से लड़ने की इनकी समझदारी

आज की नारी, है सबपर भारी।


जीवन के पथ पर ढेरों इसकी जिम्मेदारी

हार इसने पर कभी न है मानी

आज की नारी को राजतंत्र की भी है जानकारी

उन्नत देश बनाना को इसने मन में है ठानी।





विमानों को आकाश में है उड़ाती

रेल को पटरी पर भी चलाना ये जानती

अंतरिक्ष की ये सैर लगती

अब न रही ये अबला, बेचारी।

.


सब पर ममता बरसाती

घर आंगन को खुशियों से रोशन कर देती

सर्वगुण सम्पर्ण कहलाने वाली

सबको खुश रखती है जो

लक्ष्मी दुर्गा काली सरस्वती का रूप है वो।


पढ़ाई में भी रहती है ये अव्वल,

चूल्हा चौका ही नहीं काम इसका केवल

ऐसा कुछ नहीं जिसमें ये हो असबल

दकियानूसी विचारधारा को धूल चटा दे

ऐसा करती है ये दंगल।


स्वाभिमानी, स्वतंत्र नारी है ये आज

हर छेत्र में बढ़ रही है यह

निपुणता एवं कार्यकुशलता के साथ

सरहदों की भी ये रक्षा करती

जाबांजो सा दम खम है रखती।


आज की नारी, सब पर है भारी

इसे कम आंकने में न कोई समझदारी

इसका प्रोत्साहन करना तुम्हारे लिए है लाभकारी

मान लो, आज की नारी है सबपर भारी।


By Smita Mahto








Recent Posts

See All
Mirrored Truth

By Rufaida Manzoor I stood beside the silent lake, With eyes that felt no urge to break. My hair fell low in shadows deep, The waters...

 
 
 
My Antidote

By Anveeksha Reddy You fill my books with your ink, seeping into the pages bright and brilliant The words etched into the cracks of it,...

 
 
 
Avarice

By Anveeksha Reddy You tear my skin and pick on my bones I label it as gluttony for you Churning and shattering the remains of my...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page