आज का युवा
By Teri Kalam
हिम्मत से उठकर मैने
सहारा कलम का लिया है आज,
अब इसी कलम से मैं लिखूँगा
देश के युवा की आवाज़ ।
आज कलम उठी है मेरी
कल कलम मुझे उठायेगी,
मैं आज का युवा बोल रहा हूँ
मेरी आग ज़ुल्म बुझायेगी ।
सरहंद की दीवार में खड़ा
मैं फतेह सिंह बोल रहा हूँ,
इतिहास के पन्नों को आज
मैं दिल्ली में खोल रहा हूँ ।
कल तक ये देश था मेरा
आज भी अपना इसे बनाऊंगा,
आने वाले कल में भी
मैं अपना इसे कहलाऊंगा ।
लड़ने से ना डरता हूँ
ना इस डर को गले लगाऊंगा,
इसी होंसले से मैं अपने
निश्चिंत ही जीत को पाऊँगा ।
गोरे आ खड़े थे आगे
उनकी दिशा को मैंने घुमाया था,
जान की बाज़ी लगा कर अपनी
इस देश को मैंने बचाया था ।
साहस वही पुराना मुझमें
कहीं भूल ना जाना तुम,
सामने आती हर मुश्किल को
करते जायेगे मिलकर गुम ।
आज के युवा में दिखती जो
वो आसमान सी उमंगे है,
अरे यही तो मेरे नये भारत की
आशाओं की पतंगे है ।
याद है मुझे कहानी अब भी
सींचे उस लहू की,
लिख दूँगा कहानी अब मैं
निडर उस बहू की ।
आज का युवा बोल रहा हूँ
क्या बात करूं उस मिट्टी की,
जाग रही है मुझमें जो
संघर्ष भरी उस चिट्ठी की ।
कूट कूट कर भरी है मुझमें
वो आज की सोच है,
तन मन में बसती है मेरे
वो कल की खोज है ।
संग जो चलती है मेरे
वो फ़र्ज़ों की सोच है,
आ पास खड़ती है मेरे
वो जवानी की होश है ।
क्या हुआ एक कल गया तो
एक कल आगे भी आयेगा,
जिस मिट्टी में तू आज ज़ख्म सींचेगा
कल उसी पे मेरे सपनो का पेड़ उग आयेगा ।
By Teri Kalam

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