आचार्य
By Vijaykumar Kishanrao Dhamangaonkar
आचार्य होता सदाचारी आचार्य,
भारतीयता का दर्शन दर्शानेवाले आदि शंकराचार्य,
अर्जुन को धनुर्धर रूप देते द्रोणाचार्य,
आचार्यों का सुचारु रूप है प्रधानाचार्य |
जिनके व्यक्तित्व में है शुचिता,
जिनके कार्य में छिपा है नेता,
सरल, साधेपन का अर्थ है देता,
जो नई खुशियों का अनुग्रह पिरोता,
वही आपके नाम की सार्थकता,
जिनका नाम अपने आप में सुजाता |
बहना केवल कठिनाइयों से है,
यह जानती हवा,
वैद्य केवल करता हर रोगी की दवा,
हर व्यक्ति जीवन की होती राहें जवाँ,
जहाँ पर थक जाए वहाँ काम आए,
नियति की सात्विक दुआ |
By Vijaykumar Kishanrao Dhamangaonkar

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