आखरी शुक्रिया
By Zarana Khamar
ऐ इश्क़ ऐसी तो क्या बात है तुझमें,
की तेरी तारीफ़ हर कोई करता है।
चाहे तू दे दे लाख ज़ख्म तोहफे में,
फिर भी ये पागल दिल तेरी ही नुमाइश करता है ।
ना है इसे ज़माने की कोई परवाह,
ना ही इसे आंधी तूफान का कोई डर है ।
तेरे आगे तो ना जाने क्यों ये खुदा भी मजबूर है |
ज़ख्म भी तू है दवा भी तू है,
हर बेवफाई की वफ़ा भी तू है।
ज़िन्दगी तो जीनी थी बस तेरे साथ,
पर कम्बखत इस मोत की वजह भी तू है।
तेरे सुरूर ने मगरूर किया,
तेरे होने का दस्तूर दिया।
फिर ऐसी क्या खता हुई हमसे,
की खफा हो कर मजबूर किया |
इन फ़ासलो ने आँखे नम की,
अंधेरो ने तनहा किया,
तेरी यादो ने जीना इस कदर मुश्किल किया,
पर फिर भी तेरा एक आखरी शुक्रिया,
क्यों की तेरे होने से मैंने इश्क़ को महसूस किया।
By Zarana Khamar

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