आ जाना
By Pragya Sharma
मैं बैरागन बन कर भटकूं तो राह दिखाने आ जाना
ब्रह्मांड, समय और जीवन का सब सार बताने आ जाना
पूनम हो और तारों की चादर भी सर पर फैली हो
तुम मत आना जब ऐसा हो कि रात सुबह के जैसी हो
पूस में कंबल ओढ़े आंगन आग जले तुम मत आना
पर शाम ढले 'गर बारिश हो तो ज्योत जलाने आ जाना
ब्रह्मांड, समय और जीवन का सब सार बताने आ जाना
मैं बैरागन बन कर भटकूं तो राह दिखाने आ जाना
तुम मत आना जब नीरस जीवन का हर पल-पल भार लगे तुम मत आना जब निकट समय जलता सारा संसार लगे मत आना तुम जब कोकिल बोली तीखी मिर्च सरीखी हो पर गीत बने, कोई धुन सूझे तो राग बताने आ जाना ब्रह्मांड, समय और जीवन का सब सार बताने आ जाना मैं बैरागन बन कर भटकूं तो राह दिखाने आ जाना By Pragya Sharma

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