अहसान
By Ishika Morolia
कोई अमल करे न जब, तो ये अंजान सीख कहां से आई?
जब कोई ठीक से कर नही सकता, तो मोहब्बत भला कहाँ से आई?
पूछना, सुनना, सुनाना इत्मीनान से, पास अपने बैठा लेना,
तुम किसी दिन फुरसत में जागो तो मुझे भी उठा लेना।
जो अधूरे रहते जा रहे किस्से दिल में, यादगार लगते हैं,
हटाओ ये कसमे-वादे, परवाह की बातें… सब बेकार लगते हैं।
बाद में अगर करले कितनी भी, तो कोई अहसान तो हमपे करता नही,
जब, जिससे, जितनी शिद्दत से चाहिए थी, तब तो वो उतनी मोहब्बत करता नही!
By Ishika Morolia

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