अहंकार
By कुणाल मंडल 'अनिकेत'
अहंकार मन का ऐसा है विचार,
जोड़-तोड़ कर ज़िन्दगी में भर देता है विकार।
अहंकार को कौन कहे मन कर लेता है मनमानी,
बुद्धि हरण कर मानव मन को करता है ये हानि।
अहंकार के कारण होती है परेशानी,
इस मायाजाल में फँस जाते है बहुत ज्ञानी।
अहंकार न कीजिए मन लीजिए प्रीत से जीत,
मिले सर्व सुख प्रेम में मानव, मान इसे जग रीत।
By कुणाल मंडल 'अनिकेत'

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