अहंकार
By Smita Mahto
तेज़ आंधी का झोंका है ये अहंकार
सब कुछ तेरा तबाह कर के छोड़ेगा
आंखों में तेरी चादर ओढ़ाकर
एक दिन तेरा सब छीन जाएगा।
ये आंखों में झूँठी चमक दिखाकर
मन-मस्तिष्क को तेरे भ्रमित करेगा
तेरी हर मंज़िल से तुझे भटका कर
जीवन को अंधकार में धकेल देगा।
इस देह को घमंड का पुतला बनाकर
तेरे निर्मल चरित को ये मैला कर देगा
तेरे अपनो को ये दुःख पहुंचकर
सबको तुझसे दूर कर देगा।
तुझे तेरे अस्तित्व का इतना भार देगा
कि सबको तू कमज़ोर समझेगा
तेरी शेखी की दीवार बनाकर
तुझे उसके नीचे दबाकर मार देगा।
एक दिन तेरा सब छीन जाएगा,
मात्र तू शून्य कहलाएगा
वास्तिविकता की सचाई में
खुदको तू लड़ता पाएगा।
By Smita Mahto

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